हमारा शरीर एक प्राकृतिक लय (रिदम) पर काम करता है। गतिविधि (Activity) और आराम (Recovery) के बीच सही तालमेल बिठाकर हम दिन भर बिना ज्यादा थके काम कर सकते हैं।
दिन भर लगातार काम करना उत्पादकता का संकेत नहीं है। मानसिक और शारीरिक थकान से बचने के लिए 'रिकवरी' बहुत आवश्यक है। खिड़की से बाहर देखना, गहरी सांस लेना या अपनी आंखें कुछ पल के लिए बंद करना भी एक प्रकार का विश्राम है।
सुबह उठते ही फोन देखने या तुरंत काम में लग जाने से दिन की शुरुआत तनावपूर्ण होती है। सुबह के पहले 30 मिनट खुद को शांति से दें। एक कप चाय या गरम पानी के साथ अपनी बालकनी में बैठना एक बेहतरीन शुरुआत हो सकती है।
लंच के बाद अक्सर सुस्ती महसूस होती है। यह एक बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे समय में भारी दिमागी काम करने के बजाय कुछ हल्का काम करें (जैसे ईमेल चेक करना) या 5 मिनट टहलें।
लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर जोर पड़ता है। 20-20-20 का नियम अपनाएं: हर 20 मिनट में 20 फीट दूर 20 सेकंड के लिए देखें। इससे दिमाग भी रिफ्रेश होता है।
जैसे फोन की बैटरी को चार्ज करते हैं, वैसे ही मस्तिष्क को भी चार्ज होने के लिए छोटे ब्रेक चाहिए। पूरे दिन में कम से कम 3 बार 10-10 मिनट का 'जीरो-स्क्रीन' ब्रेक लें।
एक साथ सब कुछ बदलने की कोशिश न करें। पहले सिर्फ एक छोटी आदत पर ध्यान दें, जैसे सुबह उठकर एक गिलास पानी पीना। जब यह आदत बन जाए, तब कोई दूसरी चीज जोड़ें।
गतिविधि का मतलब सिर्फ जिम जाना नहीं है। ऑफिस में सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, फोन पर बात करते हुए कमरे में टहलना, या घर के छोटे-मोटे काम करना भी एक अच्छी शुरुआत है।
सोने का एक निश्चित समय तय करना सबसे जरूरी है। बेडरूम को शांत रखें और सोने से एक घंटे पहले गैजेट्स को दूर रख दें। इससे शरीर को प्राकृतिक रूप से नींद का सिग्नल मिलता है।